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अर्थ

मेरे गॉव को जरुरत है  उतने ही मोची की  जो बना सके उतने ही जूते  जिनते पाव है गांव में  उतने ही दर्जी की  जो सिल सके गांव के सारे  लोगो के कपडे  उतने ही व्यापारी की  जो ला सके शहर से उतना ही सामान  जितना जरुरत हो गॉव में  उतने ही किसान  जो कर पैदा कर सके उतना ही अनाज  जिससे पर्याप्त हो गांव के लोगो को  और याचक को भी मिल जाए  उसका हिस्सा एक शिक्षक  जो पढ़ा सके स्वाबलंबन का पाठ  एक वैद्य की जो  जो कर सके मौसमी बीमारी का इलाज  एक राजा इस बात का नियंत्रण कर सके, की  अनाज के बदले  किसानो को मिल जाए  कपडे, हल, और सोने लिए खाट  अगर ये भी न हो तो  कम कम से इतना सुनिश्चत करे, की  शहर का ,कोई भी आदमी  घुस न  सके गॉव में। ~ राजेश