पाठशाला
शरण्या, आज से आपकी जीवन की नवीन यात्रा प्रारंभ हो रही है। आज पाठशाला का पहला दिन है। अब यहाँ से आपको अकेले ही आगे बढ़ना होगा। अब आप अपने आँगन के सुरक्षा घेरे से बाहर निकल रहे हो। आपको ही इस कच्ची पगडण्डी में अपने पैर जमाकर चलना सीखना होगा। अब शायद हमारी आँखे हमेशा चौबीसों घंटे आपको नही देख पाएगी। अब कोई हाथ आपको गिरने से बचाने के नही होगा। जब आप गिर जाओगे तो आपको खुद ही उठना होगा। और यहाँ आपके पास रोने का कोई विकल्प भी नही होगा। अब ये दुनिया आपको नए नए बहाने से अपना ज्ञान सिखाने की कोशिश करेगी। सब आपको, अपनी तरह बनाने की कोशिश करेंगे। पर आप किसी के ज्ञान को ऐसे ही नही अपनाना, सभी को धीरज से सुनना, उनके बाद उनकी बातो को अपने अनुभव के तराजू में तौलना, फिर उसके बाद ही जो अनुभव आपको होगा, वही सत्य आपका अपना ज्ञान होगा। आप किसी और कि तरह बनने की कोशिश भी नही करना, क्योंकी तुम ही हो, तुम्हारी तरह, और तुम्हारे जैसा कोई और नही। आपका जन्म जिस संस्कृति में हुआ है वह संसार की सबसे उत्कृष्ट सनातन संस्कृति है। जो अनादि काल से इस ब्रामाण्ड में प्र...