Posts

Showing posts from March, 2022

भूलना

मै एक ख्याब हूँ  बुरा,  सोच के भूल गया है, वो  जाने  सोच के बुना था मुझे  चार कदम भी साथ न चल सका, पता नहीं कितनी कहानी बुनी हो  मुझसे भूलने के लिए  या यूँ ही भूल गया हो, वो  क्या भूलने का मतलब झुठलाना है भूल तो सकता है झुठला भी सकता है, क्या  मै चलता हूँ तेरे  वदन में  सरकते सरकते थक जाता हूँ  शून्य हो जाता हूँ  कितने और कहाँ तक  - राजेश कुमार