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Showing posts from 2022

चक्र

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वो मुझे और मेरे प्रेम को, मिटा देना चाहता था, अपने जीवन से,  समय का पहिया था उसके हाथ में, वो सब कुछ मिटा देना चाहता था, फिर क्या था, जब भी प्रेम मिटाने के लिए, समय का पहिया घुमाता, और अपने अतीत में चला जाता, वहां उसे,  मुझसे फिर से प्रेम हों जाता, जब वर्तमान में आता तो फिर से प्रेम को मिटाने के लिए समय का पहिया घुमाता, अब वो समय के एक चक्र में फस गया था, अब शायद ही कोई उसे, इससे निकाल पाए, वो हजार बार मिटाने कोशिश करता और हजार बार  फिर से प्रेम कर बैठता, यही उसकी सजा थी, एक कभी न खत्म होने वाली अनंत यात्रा में अनंत बार कोशिश करना। अब वो कभी प्रेम को छोड़ सकेगा नाही कभी उसे अपना सकेगा। -राजेश

मालगुडी डेज

इससे अच्छी पटकथा शायद ही आज तक किसी ने लिखी होगी। दो लोग बात कर रहे है, बिलकुल अलग अलग भाषा में, और दोनो बात करने में कोई परेशानी भी नही हो रही। दोनो एक दूसरे को समझ भी रहे है।  जबकि दोनो की संस्कृति, भाषा, व्यवहार, आर्थिक स्थिति, रंग और उपासना में जमीन आसमान का अंतर है जो हिंदी में बोल रहा है, उसका नाम मनी है।उसका हर एक वाक्य अपने आप में एक साहित्य है। इस वार्तालाप में मनी एक संवाद बोलता है, ध्यान से पढ़ो इस संवाद को और मजे लो--  ""साब पढ़ा लिखा तो मैं हूं नही, हमारे जमाने में तो संस्कृत की पाठशाला होती थी, ब्राह्मण के लड़के जाते थे उसमे । हमारा क्या ?दिन रात खेत पे, बुआई से कटाई के दिनो तक लगे पड़े है वहीं। पढ़ने लिखने की फुरसद ही किसे है, इसीलिए तो मै अंग्रेजी बोल नही पाता। आपके वहां तो कुत्ते बिल्ली भी अंग्रेजी बोलते होंगे, हमारे यहां तो अफसर और ऊंचे लोग ही जानते है हां एक डाकिया है वो अंग्रेज़ी जानता है पर अंग्रेज़ी जानने से क्या होता है साब? पिछले साल ही उसकी औरत भाग गई। साब,  मैं एक बात कहुंगा, हर इंसान को अपनी औरत पे कड़ी नजर रखनी चाहिए। कुछ भी हो, बदनामी तो अपनी ...

पाठशाला

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शरण्या, आज से आपकी जीवन की नवीन यात्रा प्रारंभ हो रही है। आज पाठशाला का पहला दिन है। अब यहाँ से आपको अकेले ही आगे बढ़ना होगा। अब आप अपने आँगन के सुरक्षा घेरे से बाहर निकल रहे हो। आपको ही इस कच्ची पगडण्डी में अपने पैर जमाकर चलना सीखना होगा। अब शायद हमारी आँखे हमेशा चौबीसों घंटे आपको नही देख पाएगी। अब कोई हाथ आपको गिरने से बचाने के नही होगा। जब आप गिर जाओगे तो आपको खुद ही उठना होगा। और यहाँ आपके पास रोने का कोई विकल्प भी नही होगा। अब ये दुनिया आपको नए नए बहाने से अपना ज्ञान सिखाने की कोशिश करेगी। सब आपको, अपनी तरह बनाने की कोशिश करेंगे। पर आप किसी के ज्ञान को ऐसे ही नही अपनाना, सभी को धीरज से सुनना, उनके बाद उनकी बातो को अपने अनुभव के तराजू में तौलना, फिर उसके बाद ही जो अनुभव आपको होगा, वही सत्य आपका अपना ज्ञान होगा।  आप किसी और कि तरह बनने की कोशिश भी नही करना, क्योंकी तुम ही हो, तुम्हारी तरह, और तुम्हारे जैसा कोई और नही। आपका जन्म जिस संस्कृति में हुआ है वह संसार की सबसे उत्कृष्ट सनातन संस्कृति है। जो अनादि काल से इस ब्रामाण्ड में प्र...

भूलना

मै एक ख्याब हूँ  बुरा,  सोच के भूल गया है, वो  जाने  सोच के बुना था मुझे  चार कदम भी साथ न चल सका, पता नहीं कितनी कहानी बुनी हो  मुझसे भूलने के लिए  या यूँ ही भूल गया हो, वो  क्या भूलने का मतलब झुठलाना है भूल तो सकता है झुठला भी सकता है, क्या  मै चलता हूँ तेरे  वदन में  सरकते सरकते थक जाता हूँ  शून्य हो जाता हूँ  कितने और कहाँ तक  - राजेश कुमार