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चक्र

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वो मुझे और मेरे प्रेम को, मिटा देना चाहता था, अपने जीवन से,  समय का पहिया था उसके हाथ में, वो सब कुछ मिटा देना चाहता था, फिर क्या था, जब भी प्रेम मिटाने के लिए, समय का पहिया घुमाता, और अपने अतीत में चला जाता, वहां उसे,  मुझसे फिर से प्रेम हों जाता, जब वर्तमान में आता तो फिर से प्रेम को मिटाने के लिए समय का पहिया घुमाता, अब वो समय के एक चक्र में फस गया था, अब शायद ही कोई उसे, इससे निकाल पाए, वो हजार बार मिटाने कोशिश करता और हजार बार  फिर से प्रेम कर बैठता, यही उसकी सजा थी, एक कभी न खत्म होने वाली अनंत यात्रा में अनंत बार कोशिश करना। अब वो कभी प्रेम को छोड़ सकेगा नाही कभी उसे अपना सकेगा। -राजेश