मालगुडी डेज
इससे अच्छी पटकथा शायद ही आज तक किसी ने लिखी होगी। दो लोग बात कर रहे है, बिलकुल अलग अलग भाषा में, और दोनो बात करने में कोई परेशानी भी नही हो रही। दोनो एक दूसरे को समझ भी रहे है। जबकि दोनो की संस्कृति, भाषा, व्यवहार, आर्थिक स्थिति, रंग और उपासना में जमीन आसमान का अंतर है जो हिंदी में बोल रहा है, उसका नाम मनी है।उसका हर एक वाक्य अपने आप में एक साहित्य है। इस वार्तालाप में मनी एक संवाद बोलता है, ध्यान से पढ़ो इस संवाद को और मजे लो-- ""साब पढ़ा लिखा तो मैं हूं नही, हमारे जमाने में तो संस्कृत की पाठशाला होती थी, ब्राह्मण के लड़के जाते थे उसमे । हमारा क्या ?दिन रात खेत पे, बुआई से कटाई के दिनो तक लगे पड़े है वहीं। पढ़ने लिखने की फुरसद ही किसे है, इसीलिए तो मै अंग्रेजी बोल नही पाता। आपके वहां तो कुत्ते बिल्ली भी अंग्रेजी बोलते होंगे, हमारे यहां तो अफसर और ऊंचे लोग ही जानते है हां एक डाकिया है वो अंग्रेज़ी जानता है पर अंग्रेज़ी जानने से क्या होता है साब? पिछले साल ही उसकी औरत भाग गई। साब, मैं एक बात कहुंगा, हर इंसान को अपनी औरत पे कड़ी नजर रखनी चाहिए। कुछ भी हो, बदनामी तो अपनी ...