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Showing posts from April, 2021

जूता

जूता, (भाग #1) आदमी के पास होते है  दो पैर, उन पैरो में होता है जूता  जूतों को बनाते है  हाथ  हाथो के पास होती है  कला  सब हाथों में नहीं  सिर्फ कुछ ही हाथ ये हाथ होते है  चर्मकारों के पास  मरे हुए जानवरो के चमड़े से  जूता बनने का रास्ता होता है लम्बा  चर्मकार काका बनाते थे जूता अब नहीं बनाते अब कहानी सुनाते है  कहते है जगली सूअर का चमड़ा  बहुत ही सख्त होता है  सिपाहियों के जूते बनते है उससे  इतना मजबूत की  बन्दूक की गोली भी  नही कर पाती छेद अब आँखों से बराबर दिखता नहीं  और बेटा भला हो सरकार का बेटा की नौकरी लग गई है  जूते बनाने वाली फक्ट्री में  और तुम हमारा क्या है  अब तो बनिये बनाते है  जूते ~राजेश Thanks rajesh for sharing this into public domain

प्रेम का समीकरण

प्रेम का समीकरण  तुम्हारा होने के बराबर  मेरा होना है  या यूँ कहु  तुम्हारे होना ही मेरा होना है। बहुत सरल है  प्रेम का समीकरण  अगर मैं  मुझ में  खुद को जोड़ता हूँ  तो  तुम बन जाते हो अगर मैं  तुम में  मुझ को जोड़ता हूँ  तब भी तुम बन जाते हो अगर मैं  तुम में  तुम को जोड़ता हूँ  तब भी   तुम बन जाते हो अगर मैं  मुझ में  तुम को जोड़ता हूँ  तब भी तुम बन जाते हो अगर मैं   मुझ में से  खुद को घटाता हूँ  तब तुम बच जाते हो अगर मैं  तुम में से  मुझ को घटाता हूँ  तब भी  तुम बच जाते हो अगर मैं  तुम से  तुम्हे घटाता हूँ  तब भी तुम ही बच जाते हो अगर मैं  मुझ में से  तुम्हे घटाता हूँ  तो  तो कुछ नहीं बचता  कुछ भी नहीं  मैं भी नही  शून्य भी नहीं  निर्वात भी नहीं। -राजेश कुमार

पिताजी और नींद

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 सबेरे ही  उठ जाते हैं पिताजी मैं सोता हूँ देर तक  गुस्सा होते है  रोज  मेरे देर तक सोने से  मेरे उठने के बाद   देर तक आती है  उनके डाँटने की आवाज़  बहुत देर तक  सुनाई देती है  कठोर जीवन की निष्ठुरता  और दुनिया की कटुता का पाठ  मेरी नींद के हर हिस्सों में  शामिल है  उनके के हिस्से की नींद नींद का जितने हिस्से   पिताजी सोये नहीं  उन्ही में से कुछ हिस्सों को बटोर कर  बेफिकर सोता हूँ मैं  मेरे जागने के बाद  पिताजी भले ही कितना भी  गुस्सा करे  पर कभी जागते नहीं है  नींद से मुझे  अच्छे से निश्चित करते है की  मैं जब तक भी सोता रहूँ  आये नहीं कोई बाधा मेरी चैन नींद में।  ~ राजेश