पिताजी और नींद
उठ जाते हैं
पिताजी
मैं सोता हूँ
देर तक
गुस्सा होते है
रोज
मेरे देर तक सोने से
मेरे उठने के बाद
देर तक आती है
उनके डाँटने की आवाज़
बहुत देर तक
सुनाई देती है
कठोर जीवन की निष्ठुरता
और दुनिया की कटुता का पाठ
मेरी नींद के हर हिस्सों में
शामिल है
उनके के हिस्से की नींद
नींद का जितने हिस्से
पिताजी सोये नहीं
उन्ही में से कुछ हिस्सों को बटोर कर
बेफिकर सोता हूँ मैं
मेरे जागने के बाद
पिताजी भले ही कितना भी
गुस्सा करे
पर कभी जागते नहीं है
नींद से मुझे
अच्छे से निश्चित करते है की
मैं जब तक भी
सोता रहूँ
आये नहीं कोई बाधा
मेरी
चैन नींद में।
~ राजेश
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