जूता
जूता, (भाग #1)
आदमी के पास होते है
दो पैर,
उन पैरो में होता है जूता
जूतों को बनाते है
हाथ
हाथो के पास होती है
कला
सब हाथों में नहीं
सिर्फ कुछ ही हाथ
ये हाथ होते है
चर्मकारों के पास
मरे हुए जानवरो के चमड़े से
जूता बनने का रास्ता होता है लम्बा
चर्मकार काका बनाते थे जूता
अब नहीं बनाते
अब कहानी सुनाते है
कहते है जगली सूअर का चमड़ा
बहुत ही सख्त होता है
सिपाहियों के जूते बनते है उससे
इतना मजबूत की
बन्दूक की गोली भी
नही कर पाती छेद
अब आँखों से
बराबर दिखता नहीं
और बेटा
भला हो सरकार का
बेटा की नौकरी लग गई है
जूते बनाने वाली फक्ट्री में
और तुम
हमारा क्या है
अब तो बनिये बनाते है
जूते
~राजेश
Thanks rajesh for sharing this into public domain
Comments
Post a Comment