प्रेम का समीकरण

प्रेम का समीकरण 

तुम्हारा होने के बराबर 
मेरा होना है 
या यूँ कहु 
तुम्हारे होना ही
मेरा होना है।

बहुत सरल है 
प्रेम का समीकरण 

अगर मैं 
मुझ में 
खुद को जोड़ता हूँ 
तो 
तुम बन जाते हो

अगर मैं 
तुम में 
मुझ को जोड़ता हूँ 
तब भी
तुम बन जाते हो

अगर मैं 
तुम में 
तुम को जोड़ता हूँ 
तब भी  
तुम बन जाते हो

अगर मैं 
मुझ में 
तुम को जोड़ता हूँ 
तब भी
तुम बन जाते हो

अगर मैं  
मुझ में से 
खुद को घटाता हूँ 
तब
तुम बच जाते हो

अगर मैं 
तुम में से 
मुझ को घटाता हूँ 
तब भी 
तुम बच जाते हो

अगर मैं 
तुम से 
तुम्हे घटाता हूँ 
तब भी तुम ही बच जाते हो

अगर मैं 
मुझ में से 
तुम्हे घटाता हूँ 
तो 
तो कुछ नहीं बचता 
कुछ भी नहीं 
मैं भी नही 
शून्य भी नहीं 
निर्वात भी नहीं।

-राजेश कुमार

Comments

Popular posts from this blog

यात्रा सार- 2015 - 2016

" Wheel Of Hope" A documentry on narrow gaug railway line

यादे