जब मैं पूर्ण विकसित हो जाऊँगा, तो पेड़ हो जाऊंगा
फिर तुम अमर बेल बन कर, मुझे पे छा जाना।

जब सूरज अंनत व्योम में, चलते चलते रुक जायगा
तब दुनिया की सारी संस्कृति, का पेड़ हो जायँगे,

दुनिया के सारे जीव पेड़ हो जायेंगे
फिर रुक जायगी,विकास की क्रिया

फिर पता चलेगा की सुकरात, कबीर
बहुत पहले पेड़ हो गए थे।

मीरा पहले से ही पेड़ थी,
जंगल हो जाना ही विकास की अंतिम लक्ष्य है


~ राजेश 

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