तुम्हारी तरह

~शरण्येत्र्यंबके ~

ये दुनिया बहुत ही सुंदर है
बिखरे है हजारो रंग, इसमे
ध्यान से देखो बेटी
अपनी नन्ही आँखो से
शांत नही होने देना
इनकी जिज्ञासाओं को, कभी

खिड़की चाहे कितनी ही छोटी
क्यों न हो, 
बाँध नही सकती तुम्हे
इसकी कोई सीमा
देख सकते हो तुम
क्षितिज के उस पार भी
अनंत तक

सुनना नही कभी भी
इस दुनिया की
चाहे कोई भी हो,
वही करना जो तुम्हारा मन चाहे
अपने ही रंगों से भरना 
अपने रंग,
अपने पंखों को फैलाकर
उड़ जाना, जहाँ मन चाहे

डरना नही कभी भी 
गिरने से,
जितनी बार गिरोगे 
उतना ही बड़ा होगा 
सफलताओ का पर्वत

इस धरती का कोई भी कोना
तुम्हारे कदमो की सीमाओं
के परे नही है
इसकी परिधि
तुम्हारे जिद के आगे 
छोटी है बहुत

तुम्हारे कदम छोटे ही सही
जहाँ भी जाओ
छोड़ आना अपने कदमो
के निशां

कभी कोशिश भी नही करना
किसी ओर की तरह बनने की
दिखने की
क्यों कि तुम ही हो, तुम्हारी तरह
याद रखना
तुम्हारे जैसा कोई और नही

~ राजेश

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